
राजनांदगांव। करीब 90 करोड़ रुपए की लागत से निर्माणाधीन राजनांदगांव-खैरागढ़ मुख्य मार्ग इन दिनों सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर चर्चा में है। निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही मार्ग के कई हिस्सों में गड्ढे, उखड़ा डामर और बिखरी गिट्टी राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को कई स्थानों पर बेहद सावधानी के साथ आवागमन करना पड़ रहा है।
✍️ रमेश निवल बालू
✍️ महेश शर्मा
राजनांदगांव, खैरागढ़, डोंगरगढ़ और महाराष्ट्र को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में भारी वाहन, कार एवं दोपहिया वाहन गुजरते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक बारिश के दौरान निर्माण कार्य प्रभावित रहा और कुछ दिनों पहले काम दोबारा शुरू होने के बावजूद सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार खैरागढ़ से बढ़ईटोला के बीच सड़क के कई हिस्सों की स्थिति खराब है। कुछ स्थानों पर गिट्टी बिछाकर काम अधूरा छोड़ा गया है, जबकि कुछ जगहों पर बिछाया गया डामर बारिश के बाद उखड़ गया है।
मार्ग पर जगह-जगह बने गड्ढों और बिखरी गिट्टी के कारण वाहन चालकों को परेशानी हो रही है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति जोखिमपूर्ण बताई जा रही है।
निर्माणाधीन सड़क पर धूल की समस्या भी राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी द्वारा नियमित रूप से पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है।
भारी वाहनों के गुजरने के दौरान सड़क से धूल का गुबार उठने से कुछ समय के लिए दृश्यता कम हो जाती है। इससे सामने से आने वाले वाहनों को देखने में परेशानी होने और दुर्घटना की आशंका बनी रहने की बात स्थानीय लोगों ने कही है।
सड़क किनारे मौजूद दुकानदारों का कहना है कि धूल के कारण दुकानों और सामान पर लगातार धूल जम रही है। वहीं स्थानीय लोगों ने आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याओं की भी शिकायत की है।
इसी मार्ग से बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे पैदल और साइकिल से आवागमन करते हैं। भारी वाहनों की आवाजाही, सड़क की खराब स्थिति और उड़ती धूल के बीच बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में चिंता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि धूल के कारण दृश्यता कम होने की स्थिति में किसी दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय बैंक के उपाध्यक्ष भरत लाल वर्मा ने भी राजनांदगांव-खैरागढ़ मार्ग के निर्माण कार्य को लेकर शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा घटिया कार्य नहीं देखा।
वर्मा ने आरोप लगाया कि अधिकारियों और ठेकेदार के बीच मिलीभगत के कारण निर्माण कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इससे सरकार की छवि प्रभावित होने के साथ ठेकेदार को लाभ पहुंचने की स्थिति बन रही है।
सड़क चौड़ीकरण के दौरान पुराने पेड़ों की कटाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों पुराने पेड़ों को चौड़ीकरण के नाम पर काटा जा रहा है।
काटे गए पेड़ों को कहां ले जाया गया और उनके बदले किस स्तर पर पौधरोपण किया गया, इसकी जानकारी सार्वजनिक किए जाने की मांग भी स्थानीय लोगों ने की है। लोगों ने सड़क निर्माण के साथ पर्यावरणीय पहलुओं पर भी ध्यान देने की जरूरत बताई है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और निर्माण एजेंसी से मांग की है कि सड़क का निर्माण पूरा होने तक मार्ग पर नियमित पानी का छिड़काव कराया जाए। साथ ही गड्ढों को तत्काल भरने, बिखरी गिट्टी को व्यवस्थित करने तथा वाहन चालकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक संकेतक और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपए की लागत से तैयार हो रहा यह मार्ग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में निर्माण के दौरान ही यदि राहगीरों को परेशानी और दुर्घटना के खतरे का सामना करना पड़ रहा है, तो संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी को स्थिति की गंभीरता से समीक्षा करनी चाहिए।
अब देखना होगा कि राजनांदगांव-खैरागढ़ मार्ग की स्थिति को लेकर प्रशासन और संबंधित निर्माण एजेंसी की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।
Publisher: प्रधान संपादक: रमेश निवल (बालू) प्रधान संपादक एवं मुद्रक: महेश शर्मा दुर्ग संभाग प्रभारी: नागेश यदु (रक्तवीर)
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